अपनापन

by Dr. Awadhesh Tiwari
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जीवन पथ में राह दिखाता,
निश्छल, निर्मल कर अन्तर्मन
तन-मन में नव भाव जगाता।
प्रिये! तुम्हारा अपनापन…

नवल सवेरा प्रतिदिन लाता
तरो ताजगी से भर जाता,
जीने का नव अर्थ बताता
साहसी प्रेरक भाव जगाता,
ख़ुश्बू से भर देता जीवन
फूलों का उपवन बन जाता,
प्रिये! तुम्हारा अपनापन

जीवन पथ में राह दिखाता।
निश्छल,निर्मल कर अन्तर्मन
तन-मन में नव भाव जगाता।
प्रिये! तुम्हारा अपनापन…

सावन में बादल बन जाता
झरने सा संगीत सुनाता,
तूफां में साहिल बन जाता
भँवर जाल से सदा बचाता,
जोश और उत्साह भरा मन
निश्चित मंजिल तक ले जाता,
प्रिये! तुम्हारा अपनापन

जीवन पथ में राह दिखाता।
निश्छल,निर्मल कर अन्तर्मन
तन-मन में नव भाव जगाता।
प्रिये! तुम्हारा अपनापन…

बासन्ती मौसम बन जाता
फागुन में तन – मन रंग जाता,
काँटों में भी फूल खिलाता
“भावुक” मन में खुशियाँ लाता,
बनकर भौंरे की गुंजन
कर्णप्रिय मृदुतान सुनाता,
प्रिये! तुम्हारा अपनापन

जीवन पथ में राह दिखाता।
निश्छल,निर्मल कर अन्तर्मन
तन-मन में नव भाव जगाता।
प्रिये! तुम्हारा अपनापन…

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