मुहब्बत वतन से

by K.R. Kushwah
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मुहब्बत  वतन  से  निभाते  रहेंगे।
तिरंगे   पै    साँसे    लुटाते   रहेंगे।

कभी  ना झुके  हैं न आगे झुकेंगे ;
यहाँ  शीश  अपना  कटाते  रहेंगे।

दिलों में ये चाहत कभी कम न होगी;
सदा  दीप   यारों   जलाते   रहेंगे।

है आँखों में ज्वाला अनल दिल में व्यापी;
सभी  दुश्मनों   को  मिटाते  रहेंगे।

रहें  शेष  जब तक लहू की ये बूँदे;
लहू  दुश्मनों   का  बहाते    रहेंगे।

नहीं  खंड  होंगे  कि प्यारे  वतन के ;
मिलाकर  कदम   यूँ  बढ़ाते  रहेंगे।

निछावर बदन अब करो हंस अपना;
धरा पे  जनम  ले के   आते   रहेंगे।

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