अधूरा छोड़ आए

by Dr. Rajmati Surana
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मोहब्बत में तेरे हम अपना घर छोड़ आए हैं,
इश्क में लिखी ग़ज़ल को अधूरा छोड़ आए हैं।

खुदा तुम को माना तुम से खुशियां मिलती हज़ार,
सबकी आंखों में आंसू का सैलाब  छोड़ आए हैं।

मां का अरमान डोली में बैठकर अपने ससुराल जाऊं,
संग तेरे नयी दुनिया बसाने सबको अकेला छोड़ आए हैं।

लगते थे प्यारे सगे-सम्बन्धी-भाई-  यार – दोस्त  ,
तेरे ख़्वाबों को सजाने घर गली मोहल्ला छोड़ आए हैं।

बाबुल का आंगन सुना कर, कमरे, चौबारे, वो छत,
बरसती बूंदों में भीगना वो सब यादें छोड़ आए हैं।

महकती बगिया और जूही,चम्पा, चमेली, गुलाब की महक,
मन को आनंदित करने वाली फिज़ाओं को छोड़ आए हैं।

प्यार की कश्ती में तेरे संग सवार हो मांझी   बन,
आंखों में उनके अश्क का दरिया हम छोड़ आए हैं।

मां छूटी,बाबूल का आंगन छूटा,छूटी सखी सहेलियां,
विश्वास की डोर में बंधने के लिए क्या क्या छोड़ आए हैं।

सब छूटे ,नम हुई इन आंखें, दिल भी रोया जार जार,
हम तो तेरी मोहब्बत में दुल्हन का चोला भी छोड़ आए हैं।।

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