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लब खामोश थे

by TilakRaj Shrimali
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अर्जुन के engineering का रिजल्ट आने वाला है।
घर में सब उत्साहित हे , पिताजी की आँखों में अलग सी
चमक है , घर में भी सब खुश है।


चिंतित हे तो सिर्फ अर्जुन ! और हो भी क्यों ना
रिजल्ट जो आने वाला है ।
लेकिन रिजल्ट ने अर्जुन की चिंता और बड़ा दी ,

हां
हां वो फेल हो गया ।
पिताजी गालियां दे रहे है
भैया भी खरी खोटी कह रहे है
बहन भी कुछ नही कह रही है
और माँ भी सुबह से बात नही कर रही है
ये सब दृश्य नजरों के पार हो गया
अर्जुन खुद की नजरों में ही गुनहगार हो गया
फिर क्या उसे जिंदगी से मोत आसान लगी
और मर गया अर्जुन ।
पिता ने भी ये कहकर पल्ला झाड़ दिया की ,
निक्कमा था, आवारा था, बेकार था ।

दिन बीतने लगे
पर
एक दिन
मानो सैलाब आ गया हो
बिजलियाँ कड़कने लगी हो
मौसम भी आदमखोर सा प्रतीत हो रहा हो
और प्रकृति भी चीख रही हो
पिता जोर जोर से रोने लगे
खुद को ही कोसने लगे
ये देखकर
घर के सभी सदस्य पूछने लगे की ,
क्या हुआ ???

लेकिन उस दिन पता नही क्या हुआ जो वो बे जोश थे ।
आँखों में आंसू , हाथो में diary और लब खामोश थे ।।
बहन ने हाथो से डायरी ली जो पेज खुला था वो पढ़ा
मानो उसके पैरो से जमीन खिसक गयी
वो भी चीखने लगी रोने लगी

उसमे लिखा था
में pilot बनना चाहता हूँ पर पिताजी नही मान रहे
में बिना मर्जी के engineering ले रहा हूँ ।
और इतना तो आपको भी पता है बिना मर्जी के किया हुए
काम में कभी सफलता नही मिलती ।

पर अब क्या ???
अर्जुन तो मर गया ना !

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