संग तेरे पिया

by Mansa Shukla
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बाँधकर नेह की डोर तुझ संग पिया
मै चलुँगी सदा संग तेरे पिया

पथ हो अनजाना सा
हो कठिन सी डगर
जब संग तुम मेरे
नही कुछ भी गम

जीने मरने का तुम संग है वादा किया
बाँधकर नेह की डोर तुझ संग पिया
मै चँलुगी सदा संग तेरे पिया।
जब तपिश दुख की झुलसायेगी राह में
थक के बैठोगे जब तुम राह में

अपने आँचल की कर
दुँगी छाया पिया
चुन के राहो के कंटक
पलक पुट से मैं

अपनी बाँहो का दुँगी सहारा पिया
बाँधकर नेह की डोर तुझ संग पिया
मै चँलुगी सदा संग तेरे पिया।
संग तेरे गुजर जाये जीवन मेरा
मुस्कुराती रहे मेरी बिन्दियाँ सदा

माँग मेरी सजाओ
सितारों से तुम
तेरी बाँहों में
निकले दम ये मेरा

बाँधकर नेह की डोर तुझ संग पिया
मै चँलुगी सदा संग तेरे पिया
मै चँलुगी सदा संग तेरे पिया।।

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