चंदामामा

by Dr. Rajmati Surana
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प्रतियोगिता के लिए कविता

चंदा मामा ,चंदा मामा,
देखो मेरा भारी बस्ता।
कन्धों पर रखू में कैसे-
थोड़ा कर दो इसको हल्का ।

अच्छी नहीं लगती मुझको,
भारी भरकम ये किताबें ।
याद नहीं होती एबीसीडी,-
याद कराओ कुछ तो तुम ।

छुपाछुपी, चोर सिपाही,
आओ मिलकर खेलें हम।
पढना लिखना भूलकर ,
गुल्ली-डंडा खेले हम।

टीचर देखो कक्षा में,
हमसे कितना लिखवाती है ।
बात बात पर डांट डांट कर-
हम बच्चों पर रौब जमाती है ।

आओ ना चन्दा मामा,
हम परियों के देश चले।
जादू सीख कर जादू से,
सारा गृहकार्य करें ।

कितना अच्छा होता जब,
काले पीले, हरे नीले रंगों से।
कोई नाता ना होता हमारा-
सोते रहते सूरज भी हमारा होता।

चंदा मामा सुनो ना तुम,
नींद आने लगे जब मुझे ।
परियों की कहानी सुना देना-
सुबह सुबह मुर्गे को भी।
गहरी नींद मे सुला देना ।
गहरी नींद मे सुला देना।।

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