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तुम लेकर हथियार चलो

by K.R. Kushwah
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देश अखंड हमारा भारत
थोड़ा कर उपकार चलो।
लोग दरिंदे हो गए बेटी
तुम लेकर हथियार चलो।

मिले भेड़िए गर राहों में
उनका कर संहार चलो ।
लोग दरिंदे हो गए बेटी
तुम लेकर हथियार चलो।

देखो निर्जन स्थानों पर वे
घात लगाए बैठे हैं।
तरस न खाते हाय भेड़िये
जाल बिछाए बैठे हैं।
नन्हीं अरु मासूम कली पर
उनको दया न आती है।
हो ना जाए कुछ अनहोनी
तेरी माँ घबराती है।

हे दुर्गा खुद को पहचानो
कर में ले तलवार चलो।
लोग दरिंदे हो गए बेटी
तुम लेकर हथियार चलो।

तेरी काया कोमल लेकिन
वे खूँखार दरिंदे हैं।
मानवता मर चुकी मगर वे
आज हवस में जिंदे हैं।
देवी का दर्जा देते पर
नारी लूटी जाती है।
अनाचार बढ़ता ही जाता
अबला नीर बहाती है।

हे रणचंडी रण में उतरो
भू का हरने भार चलो।
लोग दरिंदे हो गए बेटी
तुम लेकर हथियार चलो।

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