झांसी की रानी

by Dr. Rajmati Surana
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थके हुए भारत में जिसने नवशंख बजा ,
वीरता की अलख जगाई थी,
बूढ़े हुए भारत में फिर से एक बार,
जन जन में जंग की लहर चलाई थी।


उम्र थी बहुत कम पर वो तो,
भारत मां पर न्यौछावर थी,
बरछी ढाल कृपाण कटारी,
को देख वह हरषाई थी।


दूर्गा की प्रतिमूर्ति वह तो,
झांसी की महारानी थी,
आजादी के खातिर जिसने,
अपनी जान गंवाई थी।


आजादी की बलिवेदी पर,
वटवृक्ष बन अटल बनी थीं,
अपनी ताकत से उसने,
अंग्रेजों से की लड़ाई थी।


अंग्रेजों के छक्के छूटे,
जब बन रणचंडी रण में कूदी थी,
वीरांगना रानी की देख वीरता,
अंग्रेजों ने मुंह की खाई थी।


सन् सत्तावन की वो क्रांति,
आंधी की तरह छाई थी,
झांसी की रानी वो जग में,
भारत जननी कहलाई थी।।

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