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आल्हा छंद

by K.R. Kushwah
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आया हूं तेरे चरणों में
दाती सुन लो करुण पुकार।
दुखियों के झोली भरती तुम
मेरा भी कर दो उद्धार ।।

मेरा मन माँ निर्मल कर दो
खुशियों की कर दो बौछार ।
अपनी शरण बिठा लो मैया
होगा तेरा अति उपकार ।।

दिल में दीप जला दो अम्बे
चारों दिश होगी उजियार ।
दीन हीन का बनूँ सहायक
निज जीवन होवै साकार ।।

बैर भाव कर दूर भवानी
बन जाऊं जन जन का मीत।
मानवता का बनूं पुजारी
होगी इस भारत की जीत।।

शेरों वाली मैया मुझको
देश प्रेम का दो वरदान ।
भारत माता की सेवा में
जाए इक दिन मेरी जान।।

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