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चंद्रमुखी

by Dr. Rajmati Surana
ChandraMukhi
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मृगनयनी सी देख आंखें उसकी खुद को भूल गया हूं,
कोमलवर्णा चंचल नयना को इतना चाहने लग गया हूं।
मदमाती हवाएं और मदमस्त मोहक मुस्कान देख उसकी,
हथेली पर नाम लिख लिख कर मिटाने लग गया हूं।

लहराते केसूओं की छांव में बैठकर संवरने लगा हूं,
चंद्रमुखी चपला है वो उसके ख्यालों में खोने लग गया हूं।
अधर उसके आम से रसीले मुस्कान उसकी मादक सी,
मीठे-मीठे अधरो का मै बन अलि रसपान करने लग गया हूं।

छम छम करती चलती है देख उसे दिल की धड़कन रुक जाती है
पल्लू उसका उडता शरमाते हुई देख अदा चाहत में डूबने लग गया हूं।
गीले गीले केसूओ को लेकर जब जब सामने आ जाती है वो,
दिल की सारी हदें लांघ में उसे जी भर के इश्क करने लग गया हूं।

शिथिल हो जाते हैं दिल के भाव प्रेम की पराकाष्ठा पर,
काजल बन जाऊं उसके नैनों का यह सोचने लग गया हूं।

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