भाव

by Surekha "Sunil" Sharma
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भाव  उकेरे नहीं जाते,
खुद-ब-खुद,
पन्नों पर उतर जाते हैं,
मन के जज्बातों के, तारो को
हिलाते हुए,


एक एक शब्द कागज पर ,
उतरने के लिए,
व्याकुल हो उठता है,
और जज्बात,
मस्तिष्क से हार कर,
खुद-ब-खुद ,शब्दों का रूप लेकर,
कोरे पन्नों पर, उतर जाते हैं,


एक भाव का स्वरूप लेकर,
जन-जन तक पहुंचने के लिए,
भाव उकेरे नहीं जाते,
खुद उतर जाते हैं,
कोरे पन्नों पर।।

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