हाथों को मैं थाम लूंगा

by Vardan Jindal
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आज बैठूंगा तारों की छाँव में
बिछा कर पलकें अपनी
इंतज़ार मैं उसका करूंगा…
दिल में छिपा रखे जो
राज़ तमाम बयान करूंगा

जला कर कुछ मोमबत्ती
एक प्यारी सी रोशनी करूंगा
बिछा कर पलाश सब जगह
एक मनमोहक सुगंध करूंगा
आज बैठूंगा तारों की छाँव में…

आ जाएगी जब वो
उसे करीब ही अपने बैठा लूंगा
कुछ सुनुंगा बात उसकी
कुछ बातें मैं अपनी सुना दूंगा
आज बैठूंगा तारों की छाँव में…

कर के फिर कुछ हिम्मत
उसके हाथों को मैं थाम लूंगा
एक बारगी वक्त को भी
उसके पहलू में ही बांध लूंगा
आज बैठूंगा तारों की छाँव में…

दे कर गुलदस्ता प्यारा सा
उससे प्यार उसी का मांग लूंगा
जीवन भर रहे साथ उसका
ये वादा आज उससे मांग लूंगा
आज बैठूंगा तारों की छाँव में…
हां… आज बैठूंगा तारों की छाँव में…!!

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