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अमवा की डाली

by Rani Indu
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झूलें सखी सारी अमवा की डाली
प्यारी प्यारी कुहके कोयलिया मतवाली


हियरा मे पियवा के बतिया छुपाय के
सुबके अचरवा दाब विरहणी बेचारी


अबकी सावन ही जो पियवा मोर आते
झूली झूली जाती मैं बाहों की डाली


बरसे बदरवा और चमके बिजुरिया
अखियन के असुवन से भीगे किनारी


मेंहदी हरी चूडी लाल बिंदिया की चम चम
सज जात बन के मैं सजनी तिहारी


मिलन की आग लगाए रे बुँदिया
सुलगे भर रतिया तोर प्रेम दिवानी


कर के हथजोरिया पुकारे निवेदनी
छनके पग पायल वे चढ़त जवानी


अंग अंग सहलाए रे ठंडी पुरवइया
छेड़े है तेरी मेरी प्रीत कहानी


ब्याहे गौरा शंकर सावन सुहावनी
वारी जाऊँ हम हूँ ओढ़ चूनर धानी

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