अबला की लाज

by Dr. Bijendra Pal Singh
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क्यों सब योद्धा मौन हो गए!
अस्त्र- शस्त्र निर्वस्त्र हुए क्यों ,
निर्बल सब बलधारी ?
गूँगे, बहरे , अन्धे , लँगड़े
लूले सत्ताधारी
खड़े काँपते कोने में क्यों कायर भीषम, द्रोण हो गए?


मात्र मान कर चीर हरण
मजबूरी वरण किए बैठे हैं,
रक्त – विरक्त हुआ सबका
सब नीची नार किए बैठे हैं।
क्या ग़जब सुरक्षा नारी को दी ,ध्यान लगा कर मौन हो गए!


पर सुन लो ! कुछ तो अन्तर है।
पत्नी में और कन्या में
भर्त्सय और वीभत्स कृत्य की
भेंट चढ़ी कोमल धन्या में ।
कहो ,युधिष्ठिर, दुर्योधन ! तुम धर्म अधर्म में कौन हो गए?


अब गरुण सजा क्यों नहीं आते ?
अबला की लाज बचाने को ।
निर्दोष, अबोध का वध होता।
कब आओगे न्याय दिलाने को?
पाञ्चजन्य, गाण्डीव, गदा और चक्र घाव पर नोन हो गए!


क्या यही नियति है नीति नियन्ता
इन निर्दोष बालिकाओं की ?
कब तक भेंट चढ़ेंगी केशव ?
ये! तेरी भ्रष्ट व्यवस्थाओं की!
क़लम कराहती, शब्द सिसकते”मयंक” भाव सब गौण हो गए।

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