चाँद सा प्यारा मुखड़ा

by Dr. Rajmati Surana
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चाँद सा प्यारा मुखड़ा आंखें उसकी कितनी हसीन लगती है,
मुस्कुराती हुई निगाहें झुका मुझे सिर्फ तुम से इश्क है ये वो कहती है।

जुगनूओ की तरह कभी इधर कभी उधर चमकते रहते हो,
मेरे तन्हा दिल को प्यार से जगमग कर दो बड़े प्यार से बोलती है।

रुंधते गले से हौले हौले टूटी फूटी आवाज में करीब आ मेरे,
तुम इतना वादियों में तन्हा तन्हा क्यों घूमते हो हर पल यही सवाल करती है।

तारों सी बन गुम सुम खड़ी करती है मुझे सवालों के कटघरे में,
बांहों में मुझे ले लम्हा लम्हा इश्क में महक जाऊं यह चाहत रखती है।

मैंने तो कुछ भी नहीं देखा तुम्हारे सिवा इस जहांन में …..,
झांकती हूं तुम्हारी आंखों में तो मुझे पुरी दुनिया दिखती है।

बडे प्यार से ….सच कहती हूं तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो ,
शरमाते हुए ये लफ़्ज़ कह मेरे दिल के तार ……….छेडती है।

पलकों में बस जाऊ तेरे अब आ भी जाओ छोड़ वादियों को,
रंग जाओ मेरे इश्क के सतरंगी रंगों में………. जज्बातों में बहती है।।

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