मेरा गाँव

by Nisha Nandini
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सूना दिल मेरा
तब आबाद हो गया
गाँव से मेरे जब कोई
संदेश आ गया।

करते थे बहुत याद
जिनको हम
यादों को उनकी
कोई आज सहला गया।

कुछ अजीज़ थे मेरे
नदिया पार के
उनकी यादों में
कोई नहला गया।

इश्क में यारों का
रूठना मनाना
आज यादों में उनकी
कोई भिगो गया।

हाथ फेरना बूढ़ी काकी का
सिर पर मेरे
दिला कर याद
कोई था जो अपनत्व दे गया।

दिन वो बचपन के
बेहद खूबसूरत थे मेरे
दिला कर अहसास
कोई दर्द में डूबो गया।

“निशा” फिर चाँद
निकला है छत पर मेरी
आज फिर गाँव से मेरे
कोई आ गया।

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