ये मेरी धरती ये मेरा आसमां

by Dr. Rajmati Surana
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रुई से धुंधलके बादलों से घिर भी जाये ये आसमान,
उगता रहेगा सूरज फिर भी पूरब दिशा में समान।
ये धरती मेरी स्वर्ग से भी ज्यादा सुन्दर हैं लगती,
आसमान में विशाल छत्र छाया सबको इसकी है मिलती।

आतंकवादी आक्रमण से बिखर भी जाये कितने नीड़,
समय की सांसों से धीरे धीरे हर जायेगी सबकी पीड़।
अन्तर मन रोता है जब धरती मेरी झुलसती है,
तिलिस्म दुनिया का अजीब सा तो कहां लोरिया गुंजती है।

वैमनस्य पैदा कर क्यों लोग धरा पर जहर घोलते है,
वेदों का भूल अमर ज्ञान को पल भर में भूलते हैं।
तारों सी झिलमिल रोशनी नभ की दिल को बहुत सुहाती है,
विश्वास की नवकोंपल दिल में तब जगती जाती है ।

आंखों में आंसू गिर गिर पड़ते घेरती है निराशा,
आसमान के नव रंग रूप से जगती मन में आशा।
अटूट विश्वास नेह बंधन फले फूले धरा पर मेरी,
आसमान को छूने की कोशिश में हो जाये मेरी पूरी।।

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