शाश्वत सत्य

by Dr. Awadhesh Tiwari
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दुनिया   में   जब    हम    आए
सभी   हँसे   केवल   हम   रोए ,
किन्तु  गए   दुनिया  से    जब
हम   चुप  थे   बाकी  सब  रोए ।

शाश्वत सत्य यही  दुनिया का
फिर  क्यों   मानव   लड़ता  है ?
छोटी – छोटी  बातों   में  क्यों ?
एक  –  दूजे    से    भिड़ता   है ।

जिसने  धरती  पर  जन्म लिया
निश्चित  ही  उसको  मरना  है ,
धन , दौलत , माया , काया का
आखिर   में   क्या   करना  है ?

सुख   की    चाहत   में    हमसे
कुछ  उलटे -सीधे काम हो गए ,
सपने    भी   पूरे     हुए     नहीं
नाहक   हम   बदनाम   हो गए ।

छल ,  प्रपंच , ईर्ष्या , लालच से
कभी   नहीं   कुछ   मिलता   है ,
मन   होता   है   दुःखी ,  खिन्न
अवसाद   हृदय   में  भरता   है ।

सचमुच  में  यदि  ख़ुशी  चाहिए
इच्छाओं  पर   रखो   नियंत्रण ,
‘भावुक’ भूत-भविष्य  की छोड़ो
वर्तमान  में  जी  लो  हर – क्षण ।

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