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इश्क में नादानी

by Dr. Rajmati Surana
Blush in love
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एक मैं और एक तुम हो,
चलो ना साहिल किनारे संग मेरे,
कुछ इश्क विश्क ही करते हैं ।

दीवाना बनाया निगाहों ने तेरी,
दिल बड़ा बदमाश है क्या करें,
चलो कुछ गुनाह शुनाह करते हैं ।

तेरे इश्क की दीवारों में,
कोई दरार पैदा ना हो कभी,
चलो ना इश्क मुकम्मल वुकम्मल करते हैं ।

कमबख्त दिमाग के ,
सारे दरवाजे बंद कर देता है इश्क,
चलो इश्क को नीलाम विलाम करते हैं ।

नादानिया झलकती है,
अभी तक ऑखों से मेरी ,
चलो कुछ आदत शादत बदलते हैं ।

इश्क को लोग यहाँ,
क्यों मुफ्त में बदनाम करते हैं,
चलो इश्क के जुनून में हदे वदे पार करते हैं ।।

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