प्रश्न चिन्ह ???

by Surekha "Sunil" Sharma
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आज ही रुचि को लड़की वाले देखने आने वाले थे, वह आज बहुत खुश थी मानो उसको पंख लगने वाले हैं! जिसे वह प्यार करती है आज उसके परिवार वाले रूचि को अपनाने आ रहे थे, घर में खुशी का माहौल था जैसे-जैसे वक्त बीत रहा था! रुचि के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी और वह वक्त भी आ गया, जिसका रुचि को इंतजार था! आशीष अपने परिवार के साथ रुचि के घर पहुंच गया और आशीष का परिवार उसे चुन्नी चढ़ा कर ही अपने घर ले गया! रुचि को यकीन ही नहीं हो रहा था कि सब कुछ इतनी जल्दी हो गया दोंनो एक बंधन में बंध कर बहुत खुश थे, धीरे-धीरे वक्त बीतता गया  और रुचि को पता चला कि वह मां बनने वाली है तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा! आशीष भी खुश था उसके घर में एक छोटा बच्चा आएगा पूरा परिवार बेहद खुश था! सभी लोग रुचि का बहुत ख्याल रखते उसकी पसंद नापसंद सारी पूरी की जाती, उसे ऑफिस भी आशीष छोड़ कर आता और लेकर भी आता उसकी हर छोटी बड़ी ख्वाहिश पूरी की जाती! धीरे-धीरे 7 महीने हो गए पता ही नहीं चला अब घर वालों ने सातवें महीने के लिए एक फंक्शन रखा, सभी लोगों को बुलाया घर में सभी मेहमानों की चहल कदमी से सभी बहुत खुश थे! रुचि को सभी ने कोई न कोई उपहार और आशीर्वाद दिया!

अधिकतर सभी के मुंह से निकल रहा था एक प्यारा सा बेटा दे भगवान सभी रिश्तेदारों के मुंह से एक ही बात सुनकर रुचिका जैसे दिल काँप सा गया! वह डर सी गई, बेटा ही क्यों? बेटी क्यों नहीं? बस यही सोचते-सोचते प्रोग्राम भी खत्म हो गया और उसे पता ही नहीं चला सभी मेहमान अपने अपने घर चले गए! लेकिन रूचि के दिल से यह बात जैसे निकल ही नहीं रही थी कि बेटी  की आज भी हमारे समाज में ज्यादा जरूरत नहीं है! किसी ने भी उसे बेटी होने का आशीर्वाद नहीं दिया! सब ने बेटे का ही आशीर्वाद दिया! इसी उधेड़बुन में रात कब बीत गई, उसे पता ही नहीं चला! सुबह उठकर उसने आशीष से पूछा आशीष बताओ तुम्हें क्या चाहिए बेटा या बेटी? आशीष ने बड़े खुश होकर कहा, “आएगा तो मेरा राजा बेटा ही!!!”

रुचि जैसे एक जगह जम गई हो उसके मुंह से कुछ नहीं निकला, बस मूर्ति  बनकर आशीष को ताकती रही, “बोली अगर बेटी हुई तो?” आशीष एकदम गुस्से से पागल हो गया और चिल्लाकर बोला, “तुम पागल हो क्या ऐसा कुछ नहीं होगा, देख लेना आएगा तो बेटा ही!” धीरे-धीरे वो टाइम भी नजदीक आ गया आशीष रुचि को लेकर हॉस्पिटल के लिए निकल गया डॉक्टर ने आशीष को बताया बच्चा थोड़ा कमजोर है और उसके गले में अमरलाल फस गई है इसलिए थोड़ी सी परेशानी होगी और ऑपरेशन करना पड़ेगा आशीष बार-बार एक ही बात कहता, “डॉक्टर साहब मुझे कुछ नहीं चाहिए, मुझे सिर्फ मेरा बच्चा चाहिए, कुछ भी करो, कैसे भी करो, मेरे बच्चे को बचा लो!”

सब कुछ ठीक हो गया, डॉक्टर लेबर रूम से बाहर आई और बोली, “मुबारक हो बेटी हुई है!” आशीष के मुंह से तो जैसे आवाज भी नहीं निकली, मानो उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई हो! अस्पताल से घर छोड़ने के बाद आशीष ऑफिस के लिए चला गया! घर में धीरे-धीरे सभी अपने कामों में व्यस्त हो गए और आशीष भी अपने ऑफिस में व्यस्त हो गया पता नहीं क्यों रूचि के प्रति धीरे-धीरे आशीष का व्यवहार बदलने लगा! अब ना तो पहले की तरह रुचि से प्यार करता था और ना ही बात करता था! इतना ही नहीं बात बात पर रुचि से चिल्लाता था और उसकी बेइज्जती करता था अब तो कई बार ऑफिस से शराब पीकर घर आता और छोटी-छोटी बातों पर रुचि पर हाथ भी उठा देता! कई बार पता नहीं क्यों रूचि के प्रति धीरे-धीरे आशीष का व्यवहार बदलने लगा अब ना तो पहले की तरह रुचि से प्यार करता था और ना ही बात करता था इतना ही नहीं बात बात पर रुचि से चिल्लाता था और उसकी बेइज्जती करता था! अब तो कई बार ऑफिस से शराब पीकर घर आता और छोटी-छोटी बातों पर रुचि पर हाथ भी उठा देता रुचि कई बार अपने आप को कोसती बेटी हुई है, तो इसमें मेरा क्या कसूर है! उसने तो बड़े प्यार से उसका नाम लक्ष्मी रखा था! अब रोज-रोज की पिटाई से तंग आ गई थी!

रुचि अपनी दृष्टि बचाने के लिए चुप रह जाती! एक दिन सन्नो रुचि की कामवाली ने पूछा मैडम यह आप पर नीला निशान कैसा है? दुखी होकर रूचि बोली, “अच्छा किया तूने शादी नहीं की, यह तेरे मालिक का ही किया धरा है!” आंख में नमी लेकर सन्नो बोली, “मैडम एक काम करो, आप साहब को बिना बताए लक्ष्मी को लेकर अपनी मां के यहां चली जाओ, थोड़े दिन अकेले रहेंगे तो पता चल जाएगा, आप की कीमत! मतलब औरत की कीमत?” फिर बड़े उदास मन से आंखों में आंसू लेकर सन्नो बोली, “सभी मर्द एक से ही होते हैं, मेरा बाप भी ऐसा है, औरत चाहे कितनी भी पढ़ी लिखी हो या अनपढ़ बड़ी बड़ी कंपनी में काम करें या घर में झाड़ू पोछा सब की एक से ही स्थिति है!” ऐसा कह कर अपने घर चली गई पर एक बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह ? छोड़ गई!

क्या बेटी होना आज भी पाप है?

क्या बेटी पैदा करना आज भी गुनाह है?

जब बहू की जरूरत होती है,

तो बेटी क्यों नहीं चाहिए?

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